प्रोजेक्ट चीता: LAC पर तैनात हेरोन ड्रोन्स बनेंगे और घातक, मिसाइल और बम से होंगे लैस

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चीन के खिलाफ प्रहार के लिए भारत ने चीता प्रोजेक्ट फिर से शुरू कर दिया है। चीन का साथ शनिवार को सैन्य स्तर पर छठे दौर की बातचीत हुई। इस मीटिंग में भारत ने साफ कहा है कि पैंगोंग और गोगरा पोस्ट से वो अपने सैनिकों को पीछे हटाए। दोनों देशों के बीच एलएसी सीमा पर तनाव बरकरार है। इस तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच राजनयीक और सैन्य स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन चालबाज चीन पैंगोंग झील से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

अब चीन को जवाब देने के लिए प्रोजेक्ट चीता के तहत बॉर्डर पर हेरोन ड्रोन्स को अब और भी ज्यादा घातक बनाया जाएगा। हेरोन ड्रोन्स का उपयोग हमारे देश की सेनाएं एलएसी पर जारी तनाव में कर रही है। भारतीय सैना के ये ड्रोन्स बेहतर तरीके से चीनी सैनिकों की निगरानी के लिए काम कर रहे हैं। इन ड्रोन्स को घातक मिसाइलों और लेजर बमों से लैस करने की तैयारी है।

ड्रोन फिलहाल पूर्वी लद्दाख में चीन सीमा के नजदीक फॉरवर्ड बेस पर इन ड्रॉन की तैनाती की गई है। भारतीय सेना इन ड्रोन के जरिए एलएसी पर पैनी नजरें बनाए हुए हैं। इंडियन आर्मी और एयरफोर्स लगातार इनकी मदद से देख रही है कि चीनी सैनिक एलएसी से पीछे हट रहे हैं या फिर नहीं। प्रोजेक्ट चीता में टोही हेरोन ड्रोन को हथिायर से लैस करना है। इनमें हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें लगाई जडएंगी। साथ ही लेजर गाइडेड बमों से लैस किया जाएगा।

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