दिग्गज खेल प्रशासक और बीएफआई के कार्यकारी निदेशक RK Sacheti का निधन

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भारतीय ओलंपिक खेल प्रशासन के दिग्गज और बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के कार्यकारी निदेशक राज कुमार सचेती का मंगलवार सुबह निधन हो गया। कार्डिएक अरेस्ट का सामना करने से पहले उन्हें कोविड-19 के कारण एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सचेती राजस्थान के अलवर के रहने वाले थे और 55 वर्ष के थे।

पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट सचेती ने भारतीय मुक्केबाजी को नईू ऊंचाई तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई। सचेती को भारत के खेल प्रबंधन के सबसे काबिल लोगों और देश के सबसे बेहतरीन खेल प्रशासकों में से एक माना जाता था। वह पिछले कुछ दशकों से भारत के सभी प्रमुख खेलों से जुड़ी उपलब्धियों के वास्तुकार थे। वह हमेशा भारतीय खेल में वृद्धि में योगदान देते रहे और वह भी सुर्खियों से दूर रहते हुए।

सचेती 2021 टोक्यो ओलंपिक के लिए अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) बॉक्सिंग टास्क फोर्स के सदस्य भी थे।

बीएफआई के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, “मेरी नजर में सचेती देश के सबसे भावुक खेल प्रशासकों में से एक थे। आरके सचेती बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का जीवन और आत्मा थे। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय मुक्केबाजी ने जिन ऊंचाइयों को छुआ है उनमें काफी हद तक उनका योगदान था। हम उन्हें बहुत याद करेंगे। मुक्केबाजी उन्हें याद करेगी। भारतीय खेल जगत को आपकी याद आएगी। आपकी आत्मा को शांति मिले मेरे मित्र। हमें आप पर हमेशा गर्व रहेगा।”

एक अनुभवी खेल प्रशासक के अलावा सचेती भारतीय ओलंपिक संघ के संयुक्त सचिव, मेघालय राष्ट्रीय खेल जीटीसीसी के अध्यक्ष और खिलाड़ियों और कोचों के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले इंसान थे।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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