बिना सेंसरशिप की डिजिटल आजादी मिलने पर खुश हैं वीर दास

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हास्य कलाकार और अभिनेता वीर दास ने अनुराग कश्यप की हालिया वेब श्रंखला ‘सेक्रेड गेम्स’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिना सेंसरशिप के डिजिटल आजादी की नई लहर भारतीय कथावस्तु को अच्छी जगह ले जाएगी। वीर दास ने रविवार को ट्वीट किया, “क्या उत्पाद है। ‘सेक्रेड गेम्स’ से जुड़े सभी लोगों के लिए बहुत खुश। इसके लेखकों के लिए सबसे ज्यादा खुश। बिना सेंसरशिप की डिजिटल आजादी की नई लहर भारतीय पटकथा को बहुत अच्छी जगह पहुंचाएगी।”

‘डेल्ही बेली’ के अभिनेता ने पटकथा के लिए लेखक वरुण ग्रोवर की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “वरुण ग्रोवर और आपकी टीम को सलाम। बहुत बहुत अच्छा काम किया।” नेटफ्लिक्स पर प्रसारित होने वाले शो में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और सैफ अली खान मुख्य भूमिकाओं में हैं।

‘सेक्रेड गेम्स’ की कहानी विक्रम चंद्रा की किताब ‘सेक्रेड गेम्स’ से ली गई है। उपन्यास आपको पुलिस अफसर सरताज सिंह और भारत के वांछित अंडरवर्ल्ड अपराधी गणेश गायतुंडे की जिंदगी से रूबरू कराता है।

इसे एक आधुनिक शहर और उसकी काली दुनिया की भयानक हिंसा के साथ दोस्ती और धोखे की कहानी के तौर पर पेश किया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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