भौमवती अमावस्या पर सूर्य चंद्रमा रहते हैं एक साथ, कल भरणी नक्षत्र में करें पितरों की पूजा

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हिंदू धर्म में वैशाख मास की अमावस्या को विशेष महत्व दिया जाता हैं वही कल यानी 11 मई को वैशाख मास की आमवस्या पड़ रही हैं इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक साथ ही राशि में होते हैं जिससे भौमवती अमावस्या का संयोग बनता है सूर्य और चंद्रमा के एक साथ होने से भरणी नक्षत्र बनता है जो पितरों की पूजा के लिए शुभ माना गया हैं तो आज हम आपको इस दिन के बारे में विस्तार से बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

भौमवती अमावस्या के दिन किए गए पितरों के श्राद्ध और पूजा से परिवार में सुख समृद्धि आती हैं इस दिन दान करने का पुण्य फल प्राप्त होता हैं इस दिन घर में पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इस अमावस्या पर गरीबों को भोजन, वस्त्र आदि का दान करना अधिक फलदायी होता हैं।

वही इस बार भौमवती अमावस्या तिथि पर 10 मई को रात 10 बजे से ही आरंभ हो जाएगा। अमावस्या तिथि 11 मई को दोपहर 2.50 मिनट तक रहेगी। इसलिए दान पुण्य और पितरों का श्राद्ध कर्म इस समय से पहले कर लेना चाहिए इस दिन सौभाग्य व शोभन योग बन रहे हैं इस दिन पीपल के पेड़ पर जाकर जल अर्पित करने और दीपदान करने का भी विशेष महत्व होता हैं वही इस दिन कुछ ​चीजों का दान करना लाभकारी होता हैं। तांबे का बर्तन, लाल वस्त्र, गेंहूं, गुड़ या लाल चंदन, मटके में पानी भरकर, दान करना लाभकारी माना जाता हैं वही भूखे को खाना खिलाना और प्यासे को पानी पिलाना भी बहुत ही शुभफलदायी माना जाता हैं।

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