Ricky Martin ने अपने परिवार पर की बात

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गायक—अभिनेता रिकी मार्टिन के परिवार में उनके पति ज्वान योसेफ संग चार बच्चे लुसिया, वेलेंटिनो, मैटेओ और रिन हैं। रिकी ने ‘द एलेन डीजेनेरेस शो’ में अपने परिवार को लेकर बात की। उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार को नॉर्मल रखने में यकीन रखता हूं। मुझे पता है कि यह बहुत से लोगों के लिए बेहद दिलचस्प बात है, जो मुझे कहते हैं कि ‘शुक्रिया रिकी अपने पति और बच्चों के साथ तस्वीर साझा करने के लिए।’ ऐसी बातें आपको खुद के लिए अच्छा महसूस कराती हैं।”

रिकी ने यह भी कहा कि उनकी बेटी लुसिया उनकी सिंगिंग को बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं।

फीमेलफस्र्ट.को.यूके की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, “मेरी एक छोटी सी बच्ची है, जिसके दो पापा हैं और तीन भाई हैं। वह दो साल की है, लेकिन उसे सब पता है। वह पूरे घर में इधर से उधर करती रहती है। उसे कोकोमेलन बहुत पसंद है इसलिए मैं उसके साथ इसे गाता रहता हूं। लेकिन वह कहती हैं, ‘नहीं, नहीं डैडी, बंद कीजिए इसे गाना।’ और ‘मैं कहता हूं अरे गाने दो ना, मैं गाना चाहता हूं।”‘

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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