Perez की रियल मैड्रिड के अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध वापसी

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फ्लोरेंटिनो पेरेज 2025 तक स्पेनिश फुटबाल क्लब रियल मैड्रिड के अध्यक्ष बने रहेंगे। क्लब द्वारा मंगलवार को इसकी पुष्टि की गई। पेरेज 2000 के बाद से ही इस पद पर काबिज हैं। 2006-2009 के बीच बीच में तीन साल के ब्रेक के साथ के बाद किसी ने उन्हें चुनाव लड़ने के बाद उनका विरोध करने के लिए उम्मीदवारी पेश नहीं की।

यह चौथी बार है जब 74 वर्षीय पेरेज निर्विरोध रूप से चुने गए हैं। 2009 में जब वह लौटे थे तब भी किसी ने उनका विरोघ नबीं किराय था।

इसका एक कारण यह है कि 2012 में पेरेस ने किसी उम्मीदवार के लिए आवश्यक शर्तों को बदलकर उनके लिए इन्हें अधिक कठिन बना दिया था। इनमें प्रमुख शर्त यह थी कि सम्भावित उम्मीदवार को कम से कम 20 वर्षों तक रियल मैड्रिड क्लब का सदस्य होना होगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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