Madrid Open : ज्वेरेव ने नडाल को हराया, सेमीफाइनल में थीम से होगा सामना

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जर्मनी के एलेक्सजेंडर ज्वेरेव ने उलटफेर करते हुए स्पेन के राफेल नडाल को लगातार सेटों में 6-4, 6-4 से हराकर मैड्रिड ओपन टेनिस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई। ज्वेरेव का सेमीफाइनल में सामना तीसरी सीड डॉमिनिक थीम से होगा। थीम ने मैड्रिड ओपन में तीन बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचे जॉन इस्नर को 3-6, 6-3, 6-4 से हराया।

थीम इस्नर के खिलाफ पहले सेट में पिछड़ गए थे लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए अगले दोनों सेट अपने नाम किए और जीत हासिल की।

ज्वेरेव इससे पहले नडाल को 2019 में नितो एटीपी फाइनल्स और पिछले साल पेरिस मास्टर्स में हरा चुके हैं।

ज्वेरेव ने कहा, “यह मेरे करियर की बड़ी जीत में से एक है। विशेषकर नडाल के खिलाफ क्ले कोर्ट में जीत हासिल करना सुखद है। हमारे खेल में यह काफी कठिन काम है।”

उन्होंने कहा, “नडाल को उनके घर स्पेन में हराना विशेष है लेकिन मुझे यह याद रखने की जरूरत है कि टूर्नामेंट अभी खत्म नहीं हुआ है।”

ज्वेरेव मैड्रिड खिताब को दूसरी बार जीतने से अब दो कदम दूर रह गए हैं।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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