Madhavan Mukund चेन्नई गणितीय संस्थान के अगले प्रमुख होंगे

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चेन्नई गणितीय संस्थान (सीएमआई) ने शुक्रवार को प्रोफेसर माधवन मुकुंद को अपना अगला निदेशक घोषित किया है। उनका कार्यकाल 1 मई 2021 से प्रभावी होगा। वह प्रोफेसर राजीव करंदीकर का स्थान लेंगे, जो 10 साल तक निदेशक रहने के बाद सेवानिवृत्त होंगे।

मुकुंद वर्तमान में फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (सीएनआरएस) और इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के फेलो द्वारा सीएमआई में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला के निदेशक हैं।

वह 1989 में सीएमआई की स्थापना के बाद से ही इससे जुड़े हुए हैं। मुकुंद ने कहा, “ऐसे समय में जब गणित और कंप्यूटिंग हमारे जीवन के हर पहलू को बदल रहे हैं, मैं सीएमआई के लिए शिक्षण, अनुसंधान और उद्योग-प्रायोजित परामर्श में बेंचमार्क सेट करने और बड़े पैमाने पर समाज पर एक सार्थक प्रभाव डालने के अवसरों को लेकर काफी उत्साहित हूं।”

सीएमआई ने तीन गणितज्ञों और कंप्यूटर वैज्ञानिकों को अपनी गवर्निग काउंसिल में शामिल किया है। ये प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल (आईआईटी कानपुर), प्रोफेसर वी कुमार मूर्ति (फील्ड्स इंस्टाएसीट्यूट, कनाडा) और प्रोफेसर वी. श्रीनिवास (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई) हैं।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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