हम भी अकेले तुम भी अकेले’ आखिरी फिल्म है जो मेरी मां ने देखी थी :Anshuman Jha

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अभिनेता अंशुमान झा का कहना है कि उनकी नई रिलीज ‘हम भी अकेले तुम भी अकेले’ उनके लिए विशेष है क्योंकि यह उनकी आखिरी फिल्म थी जिसे उनकी माँ ने पिछले साल मरने से पहले देखा था।

वह कहते है कि “मेरी माँ हमेशा मेरे दिल में ताकत का स्तंभ बनकर रहेगी। मेरी फिल्म हम भी अकेले तुम अकेले आखिरी फिल्म है जिसे उन्होंने मरने से पहले देखा था यही वजह है कि यह मेरे लिए और भी खास है।”

फिल्म में जरीन खान भी हैं। कहानी दिल्ली के मैकलोडगंज में एक समलैंगिक पुरुष और एक समलैंगिक महिला की सड़क यात्रा के इर्द गिर्द घूमती है, और बताती है कि कैसे वे यात्रा के दौरान प्यार और साहचर्य का सही अर्थ खोजते हैं।

उन्होंने कहा, “एक अभिनेता के रूप में मेरा प्रशिक्षण सबसे अच्छा नहीं हो सकता, लेकिन सबसे खराब परिस्थितियों में मैं सबसे अच्छा हो सकता हूं। यह किरदार चुनौतीपूर्ण था और इससे भी अधिक ये था कि घर पर सब क्या सोचेंगे। लेकिन मुझे उम्मीद है कि मैं सक्षम हूं। और फिल्म को मिलने वाले प्यार के लिए मैं बहुत आभारी हूं, खासकर एलजीबीटीक्यू समुदाय से”

फिल्म की स्ट्रीमिग डिजनी प्लस हॉट स्टार पर हो रही है।

–आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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