गुलजार, सुखविंदर सिंह कार्टून शो ‘Lambuji Tinguji’ के लिए साथ आए

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अनुभवी गीतकार गुलजार और गायक सुखविंदर सिंह ने संगीतकार सिमाब सेन के साथ आगामी कॉमेडी कार्टून शो ‘लैंबूजी टिंगूजी’ का शीर्षक ट्रैक बनाया है। सेन ने कहा, ‘लैंबूजी टिंगूजी’ शीर्षक ट्रैक अद्वितीय और मजेदार है, और यह उपयुक्त रूप से वर्णों का वर्णन करता है। गुलजार साहब ने सबसे शानदार गीत बनाए हैं और उनके साथ जाने के लिए फंकीय ट्यून बनाना मजेदार था। वहीं सुखविंदर की आवाज ने इसकी जीवंतता को जीवंत कर दिया है। इस धुन के लिए युवा प्रशंसकों का रियेक्शन गेखना चाहता हूं,और आशा करता हूं कि इसे बहुत प्यार मिलेगा।”

सुखविंदर ने कहा, “मुझे ‘लैंबू जी टिंगू जी’ के शीर्षक गीत को रिकॉर्ड करने में बहुत मजा आया, खासकर गुलजार साहब के अनूठे गीतों की वजह से। निर्देशक सुहास इस शो के माध्यम से संपूर्ण मनोरंजन पैकेज लेकर आए हैं।”

शो की कहानी दो कार्टून चरित्रों और उनकी दोस्ती के इर्द गिर्द घूमती है। यह शो आज से (3 मई) पोगो चैनल पर प्रसारित होगा है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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