पेशेवरों की ओर से पेश मुफ्त online learning platform छात्रों के लिए बना वरदान

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आवश्यकता आविष्कार की जननी है, यह आम कहावत है, जिसे साबित कर दिखाया है सतीश, शेरी, फिरोज और श्याम ने जो इस समय क्रमश: त्रिशूर, मस्कट, बोस्टन और न्यूयॉर्क में हैं। इन्होंने वर्ष 2016 में एक गैर-लाभकारी संगठन बनाया, जो काम करने वाले पेशेवरों द्वारा ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करता है, न कि पेशेवर शिक्षकों द्वारा। लेकिन जब महामारी आई, तो इस ऑनलाइन लर्निग प्लेटफॉर्म को पंख लग गए और अब भारत और मध्य-पूर्व में कक्षा 6 से 12वीं तक यह छात्रों का सबसे अच्छा दोस्त बन गया है।

हालांकि ये चार इंजीनियर दुनिया के विभिन्न स्थानों में बैठे थे, लेकिन यह आम बात थी कि सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज, त्रिशूर के पूर्व छात्र होने के नाते, उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया और जो उन्होंने चाहा, वह पाया।

टीम को प्रोटोटाइप और फाइन ट्यून करने में कुछ वर्ष लगे और इसने पचास से अधिक क्लासरूम और ऑनलाइन सेशन के लिए वैकल्पिक शैक्षिक मॉडल ‘नोन टू अननोन’ एप्लिकेशन-आधारित शिक्षा और एकीकृत पाठ्यक्रम तैयार किया जो वैश्विक और सिलेबस-एग्नोस्टिक पर आधारित है।

यह आइडिया साल 2020 की शुरुआत में परवान चढ़ा, जब दुनिया में कोविड का प्रकोप फैला और ऑनलाइन शिक्षा ग्रामीण भारत में भी लोकप्रिय हो गई।

एक साल के भीतर, इस पोर्टल ने दुनियाभर में 40 से अधिक पेशेवरों द्वारा 500 से अधिक सत्र आयोजित किए हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों जैसे इंजीनियरिंग से लेकर संगीत, खनन से लेकर खानपान, वैज्ञानिक अनुसंधान से लेकर फिल्में और इतिहास से लेकर वित्त तक को कवर किया।

व्याख्यान देने वाले पेशेवरों में डॉ. राजीव मोहनराज, एनएचएस, यूके में न्यूरोसर्जन, डॉ. नजीब कुझियाल, एक्सॉन मोबिल, यूएसए के वैज्ञानिक, साइबिल सजेट, कतर में इंजीनियरिंग प्रबंधक, निधि जैन सेठ, दिल्ली से सीईओ, राजेश मुत्ताथ, एडवोकेट, मलेशिया से डॉ. अरुण थैंकम, एसेक्स यूनिवर्सिटी, यूके के प्रोफेसर, रोहिन नारायणन, यूएसए के बड़े हाइड्रोन कोलाइडर में वैज्ञानिक, डॉ. सीना देवकी, यूके से किशोर मनोचिकित्सक व अन्य शामिल हैं।

कुवैत के नियमित छात्रों में से एक, धनुश्री सुरेश के अनुसार, “ग्रेनएड को अलग बनाता है, छात्रों को स्वतंत्र रूप से सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहन करना और वास्तविक जीवन के बारे में रुचि दिखाने वालों के सभी सवालों के जवाब उदाहरणों के साथ देना।”

संस्थापकों में से एक सतीश बताते हैं, “आज तक, इन बच्चों ने हमारे लाइव और इंटरेक्टिव कक्षाओं में संयुक्त रूप से 12,000 छात्र घंटे बिताए हैं।”

अधिकांश सत्र लगभग 60 मिनट लंबे होते हैं और माता-पिता और छात्र पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट ग्रेन-एड डॉट कॉम के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं, जो प्रत्येक सत्र के लिए समय, विषय और बैठक आईडी प्रदान करता है। नोट्स, पिछले सत्र के वीडियो और ऑफलाइन गतिविधियों को भी इस पोर्टल के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है।

बंगलोर के एक अभिभावक मिरियम जोसेफ ने कहा, “यह एक वैकल्पिक शिक्षा है, क्योंकि यह काम कर रहे पेशेवरों द्वारा दी जाती है और उन सिद्धांतों पर बहुत अधिक निर्भर नहीं करता है, जो छात्रों को उनकी पारंपरिक कक्षाओं में पहले से दी जाती रही हैं।”

सतीश ने कहा कि सभी सत्र छात्रों से इंटरेक्टिव भागीदारी के साथ चलाए जाते हैं और एक बार पूरा होने पर, यह वीडियो के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।

वहीं, आशीष ने कहा, “फोकस मूल सिद्धांतों को लागू करने पर है और एप्लिकेशन-उन्मुख प्रशिक्षण विधियां सबसे अलग, अनूठी हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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