भारत के पूर्व दिग्गज फुटबालर Fortunato Franco का निधन

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भारतीय फुटबालर और 1962 एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे फोर्टुनाटो फ्रैंको का सोमवार को गोवा में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। उन्होंने 1960 रोम ओलंपिक में भी हिस्सा लिया था और वह गोवा से ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले एकमात्र फुटबालर थे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने फोर्टुनाटो के निधन की पुष्टि की है। फोर्टुनाटो के परिवार में पत्नी, बेटा और बेटी हैं।

पूर्व मिडफील्डर फोर्टुनाटो 1962 में जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे, जहां फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 2-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। उनका यह आखिरी मैच था, जिसमें उन्होंने जरनैल सिंह के गोल में अपना असिस्ट किया था।

गोवा के कोलवले में 1937 में जन्मे फोर्टुनाटो छह साल की उम्र में अपने परिवार के साथ मुंबई चले गए थे। वहां उन्होंने महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया और संतोष ट्रॉफी में राज्य की टीम की कप्तानी भी की और मुंबई में वेस्टर्न रेलवे और टाटा फुटबॉल क्लब के लिए भी खेले। बाद में उन्होंने गोयन फुटबॉल के दिग्गज सालगांवकर का भी प्रतिनिधित्व किया।

भारत के लिए 26 इंटरनेशनल मैच खेलने वाले फोर्टुनाटो ने दिसंबर 1959 में एनार्कुलम में एशियन कप क्वालीफायर्स में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने 1960 में रोम ओलंपिक में हिस्सा लिया था। वह 1966 में अपना घुटना चोटिल करा बैठे थे और इसके कारण वह करियर छोटा रहा।

फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद फोर्टुनाटो ने टाटा समूह में जनसंपर्क में एक वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कंपनी को अपनी सेवाएं दी। इसके बाद वह 1999 में वहां से रिटायर हो गए और बाद में वापस गोवा चले गए।

नयूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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