Moscow hotel में आग, 2 लोगों की मौत, 18 घायल

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मास्को में एक पांच मंजिला होटल की इमारत में आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई जबकि इस हादसे में 18 अन्य लोग जख्मी हो गए। स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को मास्को में एक पांच मंजिला होटल की इमारत में आग लगने से दो लोगों की मौत और 18 अन्य लोगों के घायल होने की सूचना दी है।

टीएएसएस समाचार एजेंसी ने बताया कि रूसी आपात मंत्रालय के स्थानीय विभाग के एक सूत्र ने बताया कि अस्पताल में दो वयस्कों की मौत हो गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्हें बचाना संभव नहीं था।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वीचनी जोव होटल में आग तड़के करीब 3.27 बजे लगी और जिसे लगभग 4.30 बजे तक बुझाया गया और उसके आस पास के 100 स्क्वेर मीटर के एरिये को कवर कर दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आग लगने के समय, 305 लोग इमारत के अंदर थे।

टीएएसएस ने कहा कि आग के कारण का पता लगाने के लिए एक जांच चल रही है, आग शॉर्ट सर्किट से भी लगी हो सकती है।

न्यजू सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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