फीफा विश्व कप: रूस के सर्गेई इग्नाशेविच ने लिया संन्यास

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फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में क्रोएशिया के खिलाफ हार झेलने के बाद रूस के अनुभवी खिलाड़ी सर्गेई इग्नाशेविक ने अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल से संन्यास की घोषणा कर दी है। क्रोएशिया ने शनिवार देर रात खेले गए मुकाबले में पेनाल्टी शूटआउट में रूस को 4-3 (2-2) से हराकर 1998 विश्व कप के बाद पहली बार अंतिम-4 में जगह बनाई।

इंग्लैंड के अखबार ‘द सन’ के अनुसार, इग्नाशेविक रूस के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं। इग्नाशेविक ने कहा, “इस विश्वकप से मेरा हौंसला बहुत बढ़ा है। मुझे बहुत मजा आया और शांति महसूस कर रहा हूं कि अपने करियर को अच्छे स्तर पर छोड़ रहा हूं। मैंने एक महान टीम के साथ और बढिय़ा कोचों के साथ खेला जिसके खिलाड़यिों ने खेल के लिए अपना पूरा योगदान दिया है। ”

38 साल के रूसी डिफेंडर ने अपना सारा समय रूसी क्लबों के साथ बिताया और विश्वकप में अपनी टीम को क्वार्टरफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वह टूर्नामेंट के सभी पांचों मैचों में खेले। उन्होंने 127 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले हैं जिसमें नौ गोल दागे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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