DU में एडहॉक और गेस्ट फैकल्टी के लिए कोविड सहायता कोष की मांग

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दिल्ली विश्वविद्यालय के एडहॉक और गेस्ट फैकल्टी के लिए एक कोविड सहायता कोष स्थापित करने की मांग की गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ यानी डूटा, एकेडमिक काउंसिल, दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन समेत कई संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से एडहॉक टीचर्स के एवं उनके परिजनों के उपचार हेतु कोष बनाने की मांग की है।

डीयू टीचर वेलफेयर फंड को भी बढ़ाने की मांग की गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय में फिलहाल 5 से 7 लाख रुपये की धनराशि पीड़ित परिवार को मिलती हैं। हालांकि शिक्षकों की मांग है कि मौजूदा महामारी को देखते हुए यह सहायता बढ़ाकर 30 लाख रुपये की जाए।

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर आभा देव ने बताया कि 600 से अधिक टीचर्स ने विश्वविद्यालय के मौजूदा कार्यकारी कुलपति पीसी जोशी को इस संबंध में एक संबंध में एक पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि ” महामारी की दूसरी लहर इतनी बड़ी संख्या में मौतें और संकट पैदा कर रही है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे। दिल्ली विश्वविद्यालय समुदाय हर दिन इसका प्रभाव महसूस कर रहा है। हम अपने सहयोगियों की मौत की खबर सुनते हैं। मौतों की खबर हम तक पहुंचती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में, हम कभी नहीं जानते कि पीड़ित परिवार कैसे हैं उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ”

एग्जीक्यूटिव काउंसिल की सदस्य प्रोफेसर सीमा दास ने कुलपति प्रोफेसर पीसी जोशी को पत्र लिखा गया है। उन्होने कहा कि ” हमारी मांग है कि एडहॉक शिक्षकों को भी दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर वेलफेयर फंड से जोड़ा जाए। शिक्षकों को इसके तहत मिलने वाले सभी लाभ भी दिये जाने चाहिए। ”

शिक्षक संगठनों ने कहा कि सबसे बुरा असर शायद एडहॉक और गेस्ट फैकल्टी के परिवारों पर पड़ा है। ये वे लोग हैं जिन्होंने बिना किसी सुरक्षा लाभ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इतने सालों तक चालू रखा है। महामारी में उन्हें आय की अनिश्चितता के कारण भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई तदर्थ और अतिथि शिक्षकों के बीच मौतें हुई हैं, और कई को बड़ी चिकित्सा लागत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल, मैनेजिंग कमेटी और वकिर्ंग कमेटी ने भी कार्यवाहक कुलपति प्रो पीसी जोशी को इस मामले में पत्र लिखा है। काउंसिल और कमेटी से जुड़े पदाधिकारियों का मानना है कि महामारी के इस मुश्किल वक्त में एडहॉक शिक्षकों के परिवारों की मदद करनी चाहिए। कोरोना के चलते डीयू के करीब 25 से अधिक शिक्षकों और कई कर्मियों का निधन हो चुका है।

डूटा का कहना है कि हम विशेष रूप से एड-हॉक और गेस्ट फैकल्टी के लिए एक कोविड सहायता कोष स्थापित करने की अपील करते हैं। प्रोफेसर आभा देव ने कहा कि विश्वविद्यालय को सभी शिक्षकों से इस फंड के लिए कम से कम एक दिन के वेतन के योगदान करने की अपील करनी चाहिए। निधि का प्रबंधन दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की सहायता से किया जा सकता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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