कोरोना के कारण क्रिकेटर Chawla के पिता का निधन

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भारतीय लेग स्पिनर पीयूष चावला के पिता प्रमोद कुमार चावला का सोमवार को कोविड-19 के कारण निधन हो गया। चावला ने अपने इंस्टाग्राम पर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, ” गहरे दुख के साथ हमें यह बताना पड़ रहा है कि हमारे प्रिय पिताजी प्रमोद कुमार चावला का 10 मई को स्वर्गवास हो गया। वह कोविड और उसके बाद की जटिलताओं से जूझ रहे थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।”

चावला आईपीएल 2021 में मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा थे। मुंबई इंडियंस ने चावला के पिता के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

फ्रेंचाइजी ने लिखा, ” हमारी संवेदना पीयूष चावला के प्रति है जिनके पिताजी प्रमोद कुमार चावला का सुबह निधन हो गया। इस मुश्किल समय में हम आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ईश्वर आपको यह दुख सहने की शक्ति दे।”

चावला ने भारत के लिए तीन टेस्ट, 25 वनडे और सात टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। वह आईपीएल में सर्वाधिक विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज हैं, जिनके नाम 164 मैचों में 156 विकेट दर्ज है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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