महामारी में India में रह रहे चीनी छात्र

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आजकल भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर जारी है। दर्जनों चीनी छात्र पढ़ाई आदि विभिन्न कारणों से भारत में रह रहे हैं। हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप के संवाददाता ने कुछ छात्रों के साथ बातचीत की और उनके जीवन का हाल जाना। येन योयुएं दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के डिजिटल विज्ञान में एमएससी कर रहे हैं। उनका सब्जेक्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई है। इस साल उनकी पढ़ाई का अंतिम साल है। अचानक आई कोविड-19 की दूसरी लहर से उनकी जि़ंदगी बदल गई है। उन्होंने कहा कि “दूसरी लहर आने के बाद दिल्ली में लॉकडाउन शुरू हुआ। तब से मुझे सिर्फ ऑनलाइन कुछ सब्जी व फूड खरीदकर अपने रूम में खाना बनाना पड़ता है। मैं बाहर नहीं जाता। मैं सिर्फ रूम में पढ़ाई करता हूं।”

चन शिंग हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में सामाजिक शास्त्र में एमए कर रही हैं। उन्होंने बताया कि फाइनल एग्जाम चल रहे थे, पर तभी उनको क्लासेज स्थगित होने की सूचना मिली। उनको पता चला कि महामारी की स्थिति गंभीर हो चुकी है। उन्होंने बताया कि “मुझे बहुत डर लगता है, क्योंकि स्थिति गंभीर है। लेकिन आसपास के भारतीय लोग महामारी को उतनी गंभीरता से नहीं लेते। उनमें से कई लोग मास्क नहीं पहनते। मैं आत्म-सुरक्षा पर बहुत ध्यान देती हूं। क्योंकि स्कूल के छात्रावास और आसपास के क्षेत्रों में कोरोना के पुष्ट मामले आए हैं। कई चीनी छात्र दूसरों से संपर्क कम करने के लिए रात में बाहर जाते हैं।”

जेएनयू में पढ़ रहे येन याओयुएं ने बताया कि “मैं छात्रवास में रहता हूं। मैं अकसर रात में बाहर जाता हूं और दिन में रूम में पढ़ाई करता हूं या आराम करता हूं, ताकि दूसरों से कम मिला जाए। मुझे पता लगा कि हमारे पास के छात्रावास में कोविड-19 संक्रमण का मामला आया है।”

येन याओयुएं ने बताया कि पिछले साल कोविड-19 की पहली लहर पैदा होने के बाद भारत स्थित चीनी दूतावास निरंतर चीनी छात्रों को महामारी रोधी सामग्री प्रदान करता रहा। यह सामग्री उनके लिए बहुत मूल्यवान है। इसी कारण उनको भारत में बने रहने का साहस हुआ है। उन्होंने बताया कि “मेरी महामारी रोधी सामग्री मुख्य तौर पर चीनी दूतावास से आई। भारत में बाहर जाकर संबंधित सामग्री खरीदना क्यों असुविधाजनक है। चीन में ये सामग्री शायद सामान्य है, लेकिन भारत में हमारे लिए ये बहुत मूल्यवान हैं।”

चन शिंग ने बताया कि पिछले साल चीनी दूतावास ने उनको बहुत महामारी रोधी सामग्री भेजी, अब तक खत्म नहीं हुई है। पर नई खेप की सामग्री फिर आ गई है। उन्होंने कहा कि भारत में महामारी-रोधी सामग्री बहुत मूल्यवान हैं, लेकिन वे कुछ सामग्री जरूरतमंद सहपाठियों को देती हैं। उन्होंने बताया कि “मैं अपने सहपाठियों को मदद देने की पूरी कोशिश करती हूं। अगर उनके पास मास्क नहीं हैं, तो मैं उनको देती हूं और महामारी-रोधी जानकारी भी देती हूं।”

येन याओयुएं ने बताया कि मातृभूमि, परिजन और दोस्तों के समर्थन से उन्हें भारत में अकेलापन महसूस नहीं होता। उन्हें आशा है कि दूसरी लहर यथाशीघ्र ही काबू में लाई जाएगी और सामान्य जीवन जल्दी से लौटेगा। उन्होंने बताया कि “चाहे भारत में चल रही महामारी हो या विश्व के अन्य जगहों में हो रही महामारी, मुझे उम्मीद है कि उसे जल्दी से नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके बाद हम सब सामान्य काम और जीवन में लौट पाएंगे।”

न्रूूज स?ोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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