Champions League : सिटी ने डॉर्टमंड को हराया, सेमीफाइनल में पहुंचा

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मैनचेस्टर सिटी रियाड माहेरेज और फिल फोडन द्वारा सेंकेंड हाफ में किए गए गोलों की मदद से डार्टमंड को हराकर चैम्पियंस लीग के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। सिटी ने 4-2 के एग्रीगेट स्कोर के साथ अंतिम-4 में जगह बनाई।

मैच के बाद सिटी के कोच पेप गुआर्डियोला ने कहा, “हम सेमीफाइनल में पहुंचकर बेहद खुश हैं। यूरोप की चार श्रेष्ठ टीमों की जमात में शामिल होना गर्व की बात है। हम जिस तरह पहले हाफ के अंतिम 30 मिनट और दूसरे हाफ में जिस तरह से खेले, वह शानदार रहा।”

दूसरे चरण के क्वार्टर फाइनल की तरह सिटी ने पहले चरण के मुकाबले में सात अप्रैल को इसी अंतर से जीत हासिल की थी। उस मैच में सिटी के लिए केविन ब्रूएल ने 19वें और फोडन ने 90वें मिनट में गोल किया था। डार्टमंड के लिए एकमात्र गोल मार्को रेउस ने 84वें मिनट में किया था।

दूसरे चरण के मुकाबले में डार्टमंड के लिए एकमात्र गोल जूड बेलिंघम ने 15वें मिनट में किया जबकि माहेरेज ने 55वें मिनट में हासिल पेनाल्टी पर गोल किया था। दूसरा गोल फोडन ने 75वें मिनट में किया।

नयूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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