मोटापे को एक बीमारी के रूप में लेने से आप ज्यादा फेट का भोजन खाते हैं, जानिए क्यों?

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एक बीमारी के रूप में मोटापे को सोचने पर कोई व्यक्ति ज्यादा फेट वाला खाना ज्यादा खा सकता है। बीमारी शब्द से पता चलता है कि शरीर विज्ञान, और जीन में कुछ समस्या है। मोटापे को एक बीमारी के रूप में सोचने से हमें धीरे धीरे ऐसा लगने लग जाता है कि इसका कोई इलाज नहीं है और हम ज्यादा खाने लग जाते हैं।

 2013 में, American Medical Association (AMA) ने आधिकारिक तौर पर रोग के रूप में मोटापा को मान्यता दी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि नए वर्गीकरण इस महामारी पर अधिक ध्यान आकर्षित करेगा जो तीन अमेरिकियों में लगभग एक को प्रभावित कर रहा है।

मनोचिकित्सक पत्रिका में प्रकाशित, अध्ययन ने 700 से ज्यादा प्रतिभागियों को देखा जो न्यू यॉर्क टाइम्स के एक लेख को पढ़ते हैं जिसमें  AMA की मोटापे की नई परिभाषा पर चर्चा की गई। शोधकर्ताओं ने क्या महसूस किया है कि बीमारी के रूप में मोटापे को समझना वास्तव में वजन को कम करने में बाधा डाल सकती है।

सूचना रोग से पता चलता है कि निकायों, शरीर विज्ञान, और जीन खराब हैं। मोटापे के लिए शारीरिक स्पष्टीकरण के द्वारा, रोग लेबल इस धारणा को प्रोत्साहित करता है कि वजन अपरिवर्तनीय है। इस लेख के बाद लोग अपने मोटापे से संतुष्ट भी होने लगे थे। और इसको कम करने के बारे में नहीं सोचते थे। दूसरी तरफ लोग इससे अपने वजन को लेकर कम चिंतित हो सकते हैं और वे खराब हाई कैलोरी फूड की तरफ रह सकते हैं। शोधकर्ता AMA के नए वर्गीकरण पर विवाद नहीं करते, लेकिन परिषद यह सवाल करती है कि उनके फैसले का सकारात्मक प्रभाव होगा या नहीं।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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