Ambedkar Jayanti ‘समानता दिवस’ के तौर पर मनाने के लिए ब्रिटिश कोलंबिया की सराहना

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भारतीय संविधान के वास्तुकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की 14 अप्रैल को आगामी 130वीं जयंती को समानता दिवस के रूप में मनाने को लेकर पश्चिमी कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के निर्णय का मुंबई में उनके परिजनों और अन्य भारतीय लोगों की ओर से जोरदार स्वागत किया गया है।

इन्होंने इसे अंबेडकर की बढ़ती वैश्विक प्रशंसा की एक और स्वीकार्यता के रूप में माना है।

वंचित बहुजन अघाड़ी के अध्यक्ष और अंबेडकर के पोते डॉ. प्रकाश अंबेडकर तथा रिपब्लिकन सेना के अध्यक्ष आनंदराज अंबेडकर का कहना है कि उनके दादा पहले से ही समाज के दबे-कुचले वर्गों के लिए एक आइकन हैं और अब दुनिया इसे बड़े पैमाने पर पहचान भी रही है।

डॉ. प्रकाश अंबेडकर ने आईएएनएस से कहा, ब्रिटिश कोलंबिया सरकार का निर्णय वास्तव में भारत के लिए और यहां तक कि उनके परिवार के लिए भी एक सम्मान है। भारतीय संविधान में समानता का सिद्धांत डॉ. भीमराव अंबेडकर के कारण निहित हैं, जिन्होंने कई अन्य देशों को प्रेरित किया है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने आईएएनएस से कहा कि वह ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत की ओर से इस सम्मान को लेकर सरकार को धन्यवाद पत्र लिखेंगे।

उन्होंने याद किया कि कैसे डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने अपने पूरे जीवन में कड़ी मेहनत की और अमेरिका में न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में लेहमैन सोशल साइंसेज लाइब्रेरी में प्रतिदिन 18 घंटे अध्ययन सुनिश्चित किया और वह बाद में 1995 में एक प्रतिमा (बस्ट) के साथ सम्मानित होने वाले अपने सबसे प्रसिद्ध पूर्व छात्र बन गए।

आनंदराज अंबेडकर ने आईएएनएस से कहा कि ब्रिटिश कोलंबिया के कदम ने हम सभी को बहुत गौरवान्वित किया है जो यह दशार्ता है कि दुनिया समझती है और डॉ. भीमराव अंबेडकर की सराहना करती है।

उद्घोषणा 1 अप्रैल को ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर जेनेट ऑस्टिन द्वारा की गई थी। घोषणा की गई थी कि 14 अप्रैल, 2021 को प्रांत में डॉ. बी. आर अंबेडकर समानता दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के नाम पर घोषित, उद्घोषणा में कहा गया है कि ब्रिटिश कोलंबिया एक सांस्कृतिक रूप से विविध प्रांत है, जिसमें कई लोग और समुदाय शामिल हैं।

इसने कहा कि ब्रिटिश कोलंबिया में स्वदेशी, अश्वेत लोग और विभिन्न समुदाय के लोग प्रणालीगत नस्लवाद, अन्याय, भेदभाव और घृणा का अनुभव करते हैं और प्रांत की सरकार नस्लवाद के सभी रूपों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ. प्रकाश अंबेडकर ने इसे सभी उत्पीड़ित मानव समाजों में सकारात्मक क्रांति को लेकर डॉ. बी. आर. अंबेडकर का सिद्धांत बताया, वहीं आनंदराज अंबेडकर ने कहा कि यह डॉ. भीमराव अंबेडकर की उनकी मानवतावादी भूमिका को सताए गए विश्व के मुक्तिदाता के रूप में सम्मान देता है।

वहीं अठावले का मानना है कि नवीनतम मान्यता यह साबित करती है कि डॉ. बी. आर. अंबेडकर न केवल भारत के हैं, बल्कि मानवता और पृथ्वी पर सभी जगह अत्याचार करने वाले लोगों के लिए भी उतना ही महत्व रखते हैं और यहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनके प्रति गहरा सम्मान भी है।

इस फैसले ने कनाडा से लेकर अन्य जगहों पर भी भारतीयों के बीच गर्मजोशी पैदा की है।

आतिथ्य उद्योग के पेशेवर शिरीष देशपांडे ने आईएएनएस से कहा, इसने सभी भारतीयों को बहुत गौरवान्वित किया है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने दुनिया को सभी प्रकार के भेदभावों को समाप्त करने के लिए सिखाया और दुनिया के कई हिस्सों में उनकी विरासत का पालन किया जा रहा है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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