भाजपा की दिल्ली प्रदेश सचिव Santosh Goyal का कोरोना से निधन

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closeup of the feet of a dead body covered with a sheet, with a blank tag tied on the big toe of his left foot, in monochrome, with a vignette added

भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई की सचिव संतोष गोयल का रविवार को निधन हो गया। कोविड-19 संक्रमण के कारण उनका निधन बताया जाता है। भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने उनके निधन पर शोक प्रकट किया है। आदेश गुप्ता ने उनके निधन पर जारी संदेश में कहा, “दिल्ली भाजपा की मंत्री संतोष गोयल के कोरोना से निधन के समाचार से स्तब्ध हूं, यह भाजपा परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। महामारी के दौरान उनके द्वारा जनता के लिए किए गए सेवा कार्य सभी कार्यकर्ताओं को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।”

भाजपा के दिल्ली प्रदेश के मीडिया प्रभारी नवीन गुप्ता ने कहा, “कल तक हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर में कार्य करने वाली प्रदेश मंत्री बहन संतोष गोयल की कोरोना संक्रिमत होने के कारण मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई, शोकाकुल हूं।”

न्यज स़ोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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