Amavasya 2021: अप्रैल महीने में दो दिन अमावस्या, इन कार्यों को करने से प्रसन्न होंगे पितृ

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हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष महत्व दिया जाता हैं वही संवतसर 2077 की आखिरी अमावस्या सोमवार को पड़ रही हैं इसे शास्त्रों में सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता हैं। शास्त्रों के मुताबिक सोमवती अमावस्या का बहुत अधिक महत्व होता हैं अमावस्या रविवार 11 अप्रैल को प्रात: 6:03 बजे सूर्योदय के साथ ही आ जाएगी। मगर तिथि वृद्धि होने से वह सोमवार को प्रात 8:00 बजे तक रहेगी। उदयकालीन अमावस्या होने के कारण दोनों ही दिन अमावस्या मनाई जाएगी। पितृ कार्यों के लिए अमावस्या सबसे श्रेष्ठ तिथि होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि अमावस्या को पितरों के निमित्त भोजन, वस्त्र, जल दान करने से बहुत पुण्य प्राप्त होता हैं तो आज हम आपको अमावस्या के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

इस बार अमावस्या तिथि का सौभाग्य दो दिन मिलेगा। सोमवती अमावस्या को गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने का भी ​महत्व होता हैं अगर आप गंगा आदि ​तीर्थ क्षेत्र में स्नान नहीं कर सकते हैं अपने घर पर ही जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान करने का मंत्र इस तरह से हैं— गंगे च यमुने च गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन्सन्निधिं कुरू।। इस मंत्र में अंतिम शब्द कुरु के स्थान पर करिष्ये बोल कर स्नान करें। अपने पितरों को जल में थोड़ा गंगाजल और काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके सूर्य को जल दे और पितरों के निमित्त अपने घर में भोजन बनवाएं और किसी ब्राह्मण या विद्वान को खिलाएं। घर में अपनी वरिष्ठ सदस्य और बूढ़े माता पिता आदि की सेवा करने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं।

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