Akshita Mudgal : महिलाओं के लिए वित्तीय तौर पर सक्षम होना जरूरी

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अभिनेत्री अक्षिता मुद्गल का मानना है कि महिलाओं को रिश्ते में रहते हुए भी वित्तीय स्वतंत्रता बरकरार रखनी चाहिए। अक्षिता इश्क पर जोर नहीं नामक सीरियल में नजर आती हैं, जो समाज में एक महिला के स्थान पर प्रकाश डालता है और महिलाओं की पसंद और अधिकारों की बात भी करता है।

अभिनेत्री का कहना है कि वित्तीय तौर पर सक्षम होने से एक महिला को उस रिश्ते से बाहर निकलने का विकल्प मिलता है, जो सही से नहीं चल रहा होता है।

अभिनेत्री ने कहा, मैं इस तथ्य पर ²ढ़ विश्वास रखती हूं कि रिश्ते को एक समान स्तर पर रखने के लिए वित्तीय स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना आपको वहां से निकलने में भी विश्वास दिलाता है कि जब शादी ठीक से नहीं चल रही हो। इसके अलावा, यह हमें हमारी व्यक्तिगत या घरेलू जरूरतों के लिए हमारे साथी पर पूरी तरह से निर्भर होने से रोकता है।

अभिनेत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के कारण मनोबल बढ़ने में भी मदद मिलती है और यह अनिवार्य रूप से महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाता है, जिससे उन्हें अपने निर्णय लेने में मदद मिलती है।

इश्क पर जोर नहीं सीरियल सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होता है।

न्यजू स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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