Delhi शकूरबस्ती, आनंद विहार में आएंगे 75 आइसोलेशन कोच

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उत्तर रेलवे ने दिल्ली सरकार की मांग पर आनंद विहार टर्मिनल और शकूरबस्ती में दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए कोविड केयर सेंटर के रूप में 1,200 बेड के बराबर 75 आइसोलेशन कोच उपलब्ध कराए हैं। हल्के कोरोना मरीजों के लिए शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर 50 पूरी तरह से ऑपरेशनल कोविड केयर कोच (800 मरीजों की क्षमता वाले) रखे गए हैं, जबकि 400 मरीजों की क्षमता वाले 25 कोच सोमवार तक आनंद विहार स्टेशन पर रखे जाएंगे।

रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने कहा कि दोनों स्टेशनों पर इन कोचों के रखरखाव के लिए अच्छा इंफ्रास्ट्रक्च र है जबकि एंबुलेंस आदि की सुचारु आवाजाही के लिए कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि जब भी जरूरत होगी, और भी आइसोलेशन कोच रखे जाएंगे। उत्तर रेलवे महामारी के खिलाफ लड़ाई को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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