मधुबनी : छठ पूजा के गीतों से गूंजने लगे घर-आंगन

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सूर्योपासना का चार दिवसीय चैती छठ नहाय-खाय अनुष्ठान शुक्रवार को संपन्न हुआ। व्रतियों ने प्रसाद स्वरूप कद्दू-भात ग्रहण किया। वहीं, आज 17 अप्रैल शनिवार को खरना अनुष्ठान सम्पन्न किया जाएगा। 18 अप्रैल रविवार अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य तथा 19 अप्रैल सोमवार उदीयमान प्रात:कालीन भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य अर्पित की जाएगा। कोरोना संक्रमण के कारण अधिकांश व्रतियों द्वारा अपने घरों की छत, आंगन या आवासीय परिसर में जलकुंड बनाकर छठ पूजा की तैयारी कर ली है। इधर, छठ मईया की लोकगीत से घरों का माहौल भक्तिमय हो गया है। छठ पूजा की गीतों पर महिलाएं भाव विह्वल होकर पूजा की तैयारी में जुटी है।

 

चैती छठ को लेकर बांस के सूप, टोकरी, डगरा, कोनियां आदि की बिक्री देखी गई। मिट्टी से तैयार हाथी, दीप, धूपदानी सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी चलती रही। छठ पूजा के लिए हल्दी, अदरक, मूली, बद्धी, खाजा, सेब, नारंगी, नारियल, गुड़, केला की बिक्री जोरों पर होती रही। वहीं किराना दुकानों पर पूजा साम‌र्ग्री की खरीदारी चलती रही। ‘कोरोना संक्रमण में चैती छठ का महत्व और बढ़ जाता है। सूर्यदेव कोरोना महामारी से निजात की मनोकामना पूरा करेंगे।’

कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति मिलेगी। घर से ही भगवान सूर्यदेव को अ‌र्घ्य अर्पित करना चाहिए।’शोभा देवी, व्रती ‘चैती छठ पूजा के प्रति अटूट आस्था रही है। कष्टों से छुटकारा मिलता है। कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए पवित्रता पूर्वक तरीके से छठ पूजा किया जा रहा है।’

चैती छठ से मनोकामना पूर्ण होती है। कोरोना को देखते हुए व्रतियों को तालाब की बजाय घरों में अ‌र्घ्य अर्पित करना चाहिए।’चैती छठ अनुष्ठान प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की पूजा से अनुष्ठानकर्ताओं का कल्याण होता है। कोरोना से बचाव के लिए व्रतियों को सावधानी पूर्वक घरों में पूजा-अर्चना करना चाहिए।’

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