ऑक्सीजन सपोर्ट के बावजूद नहीं बच सकी कोरोना पीड़ितों की जान तो सिलिंडर पर टूट पड़े लोग

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आज सबसे बड़ी फिक्र कोरोना (Corona) की और कोरोना में भी ऑक्सीजन (Oxygen) की. कल्पना कीजिए कि हालात कितने डरावने हैं. अभी तक हम ये सुन और देख रहे थे कि अस्पतालों (Hospitals) में ऑक्सीजन की कमी है. इस वजह से मरीज इधर-उधर भटक रहे हैं.  जिसमें 11 महिलाएं शामिल हैं. इस घटना के बारे में सुनेंगे तो आपके मन में भी सवाल आएगा कि ये मौत कहां है… ये तो कोरोना के उन 24 मरीजों की हत्या है, जो जीवन बचाने के लिए अपनी सांसों को किसी तरह सहेज रहे थे. नासिक नगर निगम के जाकिर हुसैन अस्पताल में ऑक्सीजन के टैंकर में लीकेज हो गया. टैंकर को दुरुस्त करने में करीब 30 मिनट का समय लगा. लेकिन इतने समय में अस्पताल के अंदर कोहराम मच गया.

एक सामान्य आदमी जब कोई काम नहीं कर रहा होता तो उसे सांस लेने के लिए हर मिनट 7 से 8 लीटर हवा की जरूरत होती है. यानी आपको हर रोज करीब 11,000 लीटर हवा चाहिए. सांस के जरिए फेफड़ों में जाने वाली हवा में 20% ऑक्सीजन होती है. जो सांस आप छोड़ते हैं, उसमें 15% ऑक्सीजन होती है. यानी सांस के जरिए भीतर जाने वाली हवा का मात्र 5% ही इस्तेमाल होता है.

तस्वीरें मध्य प्रदेश के दमोह की हैं. यहां मंगलवार की रात जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की खेप पहुंचते ही सिलेंडर की लूट शुरू हो गई. मरीजों के परिजनों ने सिलेंडर उठाकर ले जाना शुरू कर दिया. हालात बेकाबू हो गए तो काम रोकने तक की नौबत आ गई. अब वाराणसी के दीन दयाल हॉस्पिटल के “ऑक्सीजन रूम” से ये रिपोर्ट देखिए. जो सिलेंडर 3 घंटे तक चलते थे, वो अब 5 मिनट में ही खत्म हो जा रहे हैं.

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