‘चिड़ियाखाना’ की शूटिंग बच्चों को ध्यान में रखते हुए की गई : निर्देशक

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बॉम्बे उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से कहा कि उनका काम फिल्मों को प्रमाणित करना है, सेंसर करना नहीं। इसके बाद निर्देशक मनीष तिवारी जिनकी फिल्म ‘चिड़ियाखाना’ अभी विवादों में घिरी है, का कहना है कि उन्होंने पूरी फिल्म की शूटिंग बच्चों की बात को ध्यान में रखकर की। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने हाल ही में बच्चों की इस फिल्म को इस आधार पर ‘यू/ए’ प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया कि इसमें हिंसा और भेदभाव है जिससे बच्चे परेशान हो सकते हैं।

इस मामले पर बात करते हुए तिवारी ने मंगलवार को कहा, “फिल्म ‘चिड़ियाखाना’ को भारत के बाल चित्र समिति के एक पैनल द्वारा मान्यता दी गई थी। वे पेशेवर हैं जो फिल्म की थीम को समझते हैं — यह एक शहर में हरित क्षेत्रों की महत्ता को दिखा रहा है जो तमाम सुविधाओं वंचित बच्चों को खेल के लिए प्रोत्साहित करती है और यह राष्ट्रीय एकीकरण के विषय को भी स्पर्श करती है। मैंने दिमाग में बच्चों का ख्याल रख फिल्म की शूटिंग की।”

उन्होंने यह भी कहा कि साधारण कहानियों से परे बच्चों को इस तरह की कहानियां भी समझनी चाहिए।

फिल्म की कहानी बिहार के एक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे फुटबॉल खेलना पसंद है और फुटबॉलर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए वह मुंबई पहुंचता है।

फिल्म में गोविंद नामदेव, रवि किशन और प्रशांत नारायण सहित कई अन्य कलाकार हैं।

तिवारी ने यह भी कहा कि हल्की-फुल्की हिंसा, खेल के दौरान आपसी प्रतिस्पर्धा और जानवरों के काल्पनिक सिर का उपयोग कर फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य हैं जिससे सीबीएफसी को ऐसा लगता है कि फिल्म को यू प्रमाणपत्र नहीं दिया जाना चाहिए। इस तरह के दृश्यों को फिल्म की कहानी, विषय और पूरी फिल्म के परिप्रेक्ष्य में दिखाया गया है।

न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी और जी.एस. पटेल की खंडपीठ ने फिल्म निर्माता की अपील का समर्थन करते हुए कहा, “किसी ने सीबीएफसी को यह बौद्धिक नैतिकता और अधिकार नहीं दिया है कि वह यह निर्णय ले सके कि कौन क्या देखना चाहता।”

अदालत का शुक्रिया अदा करते हुए फिल्म निर्माता ने कहा, “सबसे पहले मेरी फिल्म को लेकर बात करने के लिए मैं जस्टिस एस.सी. धर्माधिकारी और जी.एस. पटेल का बहुत आभारी हूं।”

इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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