Yuvraj Singh ने 2007 में आज ही के दिन मारे थे 6 छक्के

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युवराज सिंह ने 2007 में आज ही के दिन यानि 19 सितंबर को विश्व क्रिकेट में इतिहास रचा था। युवराज ने इस दिन इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में छह गेंदों पर छह छक्के मारे थे और टी-20 में वह ऐसा करने वाले पहले बल्लेबाज बने थे।

युवराज ने दक्षिण अफ्रीका में खेले गए टी-20 विश्व कप के मैच में यह इतिहास रचा था। डरबन के किंग्समीड स्टेडियम में खेले गए मैच में भारतीय पारी के 19वें ओवर में युवराज का बल्ला गरजा था और उनके बल्ले से छह छक्के निकले थे।

इन छह छक्कों की मदद से युवराज ने महज 14 गेंदों पर 58 रनों की पारी खेली थी जिसके बूते भारत ने 20 ओवरों में 218 रन बनाए थे।

उनकी पारी मैच के परिणाम में असरदार साबित हुई और भारत ने इंग्लैंड को छह विकेट पर 200 रनों पर रोक यह मैच 18 रनों से जीता।

यह ड्रामा शुरू हुआ था 18वें ओवर में। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम का स्कोर तीन विकेट पर 171 रन था। रोबिन उथप्पा के बाद बल्लेबाज करने आए युवराज ने एंड्रयू फ्लिंटॉफ द्वारा फेंके गए 18वें ओवर में दो चौके मारे। इससे इंग्लैंड का गेंदबाज तिलमिला गया और युवराज से भिड़ गया। मैदानी अंपायरों ने बीच में दखल दिया और मामला शांत कराया।

लेकिन युवराज का गुस्सा उबल रहा था और उन्होंने अगले ओवर में स्टुअट ब्रॉड की गेंदों पर इसे जमकर निकाला।

न्यज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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