वाईएसआर कांग्रेस ने 151 विधानसभा, 22 लोकसभा सीटें जीतीं

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वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आंध्र प्रदेश में 175 सदस्यीय वाले विधानसभा में 151 सीटें जीत ली है और साथ ही इसने 25 में से 22 लोकसभा सीटें भी अपने नाम कर ली है।

चूंकि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मध्य रात्रि के बाद तक भी वोटों की गिनती होती रही, लोगों में वाईएसआरसीपी और तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के बीच के मुकाबले को लेकर उत्सुकता बनी रही लेकिन शुक्रवार की सुबह तस्वीर साफ हो पाई।

तेदेपा 23 विधानसभा और तीन लोकसभा सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही।

चुनाव में आगाज करने वाली अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) को एक विधानसभा सीट मिली। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दोनों ही खाली हाथ रह गए।

गुरुवार देर रात घोषित परिणामों में तेदेपा के गाल्ला जयदेव ने वाईएसआरसीपी के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एम. वेणुगोपाल रेड्डी के ऊपर 4,800 वोटों के अंतर के साथ गुंटूर लोकसभा सीट को बरकरार रखा।

तेदेपा के केसिनेनी नानी और के. राममोहन नायडू ने भी कांटे के मुकाबले के बाद क्रमश: विजयवाड़ा और श्रीकाकुलम लोकसभा सीटों को बरकरार रखा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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