वाईएसआर कांग्रेस नेता विवेकानंद रेड्डी का निधन

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आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता वाई.एस.विवेकानंद रेड्डी (68) का शुक्रवार को हृदय गति से रुकने से निधन हो गया।

रेड्डी के परिवार ने यह जानकारी दी।

विवेकानंद को कडपा जिले के पुलिवेंदुला में उनके आवास पर हृदय गति से रुकने से निधन हो गया।

वह लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं।

विवेकानंद आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस.राजशेखर रेड्डी के छोटे भाई थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी व एक बेटी है।

वह कडपा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 1999 व 2004 में सांसद निर्वाचित हुए। वह आंध्र प्रदेश विधानसभा के दो बार (1989, 1994) में पुलिवेंदुला से निर्वाचित हुए।

विवेकानंद आंध्र प्रदेश विधानसभा परिषद के लिए 2009 में निर्वाचित हुए और किरण कुमार रेड्डी सरकार में कृषि मंत्री रहे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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