अपनी 16 माह की बेटी से बाप ने की शादी, कारण जानकर हैरान हो जायेंगे आप

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शायद आपको भी यह खबर पढकर यकीन नहीं हो रहा होगा ​क्योंकि कोई बाप ऐसा नहीं होता है जो कि अपनी ही बेटी से शादी कर रहा हो, मगर आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे हैं वो बिल्कुल सच है । दोस्तों, आपको बता दें कि यह खबर लंदन की है । इस शख्स का नाम एंडी बर्नार्ड है जिसने अपनी ही 16 माह की बेटी से शादी की । आपको बता दें कि, इस बच्ची का नाम पॉपी है । जो कि ब्रेन कैंसर से पीडित है और कुछ ही दिनों की मेहमान है ।

जब ये बात एंडी को पता चली तो उन्होंने अपना वो सपना पूरा किया जो उन्होंने अपनी बेटी के जन्म के बाद अपनी आंखों में बसाया था । एंडी के इस कदम पर उनकी पत्नी सैमी और उनका पूरा परिवार शामिल था, पॉपी की कीमोथेरिपी चल रही है लेकिन वो अस्पताल में नहीं है बल्कि घर पर है ताकि उसको परिवार का प्यार मिल सके ।

इसके बारे में, उन्होंने कहा कि उनकी 16 माह की नन्ही जान को ये तक पता नहीं कि उसकी जिंदगी खत्म होने जा रही है, जिसके कारण मैं अपना सपना पूरा करने जा रहा हूं ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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