PM मोदी के जन्मदिन को युवाओ ने राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस के तौर पर मनाया, क्या अब मन की जगह होगी काम की बात ?

0

17 सितंबर, आज पीएम मोदी का जन्मदिन है और वह आज 70 वर्ष के हो गए हैं। उनके चाहने वालो और सहयोगियो ने उन्हें रात 12 बजे से ही मुबारक बाद देना शरू कर दिया था, जिसके कारण कल रात से ही ट्विटर और बाकि सोशल मीडिया हैंडल्स पर #HappyBdayNaMo, #PrimeMinister, #NarendraModiBirthday और #NarendraModi काफी ट्रेंड करने लगा था। लकिन इसी बीच बेरोजगार युवाओ ने PM मोदी का जन्मदिवस कुछ लग ही ढंग से मानाने का फैसला किया हुआ था। और रात 12 बजे से ही उसके जन्म दिवस के साथ साथ एक और हैशटैग था जो टॉप ट्रेंड पर हुआ, जिसे मोदी के लिए युवाओ का उपहार माना जा रहा हे।

कोरोना काल में बेरोजगारी और अस्थिर अर्थवावस्थ्या को लेकर युवाओ में अच्छा खासा रोष है। इसके अलावा जैसा की मोदी ने हर साल २ करोड़ रोजगारो का वादा किया था उसके पूरा ना होने चलते भी ऐसा है। युवाओ का कहना है की मोदी सरकार रोजगार पैदा करने और रोजगार प्रदान करने में पूरी तरह से विफल रही है। जिसके चलते उन्होने नरेंद्र मोदी के जनम दिवस को राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस के रूप में मानाने का फैसला किया है।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर ही राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस क्यों ट्रेंड कर रहा है?

वही अगर आकड़ो की बात करे तो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार वर्ष 2020 की अप्रैल-जून तिमाही में देश की जीडीपी में 23.9 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है जो बीते 40 वर्षों में सबसे भारी गिरावट है। बेरोजगार लोगों की संख्या बढ़ने की संभावना है बस इसी लिए नहीं लगायी जा रही है क्योंकि लोग न सिर्फ नौकरी खोजने में असफल हो रहे हैं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि कई पहले से ही कार्यरत हैं उनकी नौकरियों को खोने की संभावना है बल्कि क्योंकि COVID-19 के कारण गए लॉकडाउन से सरे देश की अर्थव्यवस्था में भरी गिरावट आयी है।

और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आकड़े ही नहीं अगर सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी की माने तो उनके आँकड़ों के अनुसार सितंबर के पहले सप्ताह में भारत की शहरी बेरोज़गारी दर 8.32 फ़ीसदी के स्तर पर चली गई है। लॉकडाउन और आर्थिक सुस्ती की वजह से लाखों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है और बड़ी संख्या में लोगों का रोज़गार ठप हो गया है। सेंटर फ़ॉर इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आकड़ों के मुताबिक़, लॉकडाउन लगने के एक महीने के बाद से अब तक क़रीब 12 करोड़ लोग अपनी नौकरियों से हाथ धो चुके हैं जिनमे से अधिकतर लोग असंगठित और ग्रामीण क्षेत्र से हैं।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और एशियन डेवलपमेंट बैंक की एक अन्य रिपोर्ट में यह बताया गाया है कि 30 की उम्र के नीचे के क़रीब चालीस लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नौकरियाँ महामारी की वजह से गंवाई हैं जिसमे 15 से 24 साल के लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ा है।

भारत के युवा काफी समय से एसएससी और अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। सप्ताह भर में, युवाओं ने ट्विटर पर अपने मुद्दों और समस्याओं को बताने की कोशिश करेंगे। इस लिए #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस के साथ साथ #राष्ट्रीय_बेरोजगार_सपता भी ट्रेंड क्र रहा है।

इससे पहले नौ सितंबर को देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं ने रात नौ बजकर नौ मिनट पर टॉर्च, मोबाइल फ़्लैश और दिए जलाकर सांकेतिक रूप से अपना विरोध ज़ाहिर किया था। इसी मुहिम को आगे बढ़ते हुए अब कई युवा और छात्र संगठन 17 सितंबर यानी प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस ट्रेंड कराकर सांकेतिक रूप से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। युवाओं की इस मुहिम को कई विपक्षी दलों और अलग-अलग संगठनों का समर्थन भी हासिल है। इस दौरान युवा छात्र #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस और #NationalUnemploymentDay हैशटैग के साथ अपनी माँगें सरकार के सामने रख रहे हैं।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात और बीजेपी के कई वीडियोज़ को को यूट्यूब पर भारी संख्या में डिसलाइक्स मिलने के पीछे भी छात्रों के ग़ुस्से को कारण बताया जा रहा था। हालाँकि पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसके लिए काँग्रेस की साज़िश और तुर्की के बोट्स को ज़िम्मेदार ठहराया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here