सेल्फी को लेकर निकाला अजीबोगरीब फरमान, लोगों का हुआ डर के मारे बुरा हाल, जानकर चौंक जाएंगे आप !

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दोस्तों, आजकल हर कोई सेल्फी का दिवाना है और वह इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता हैं । सेल्फी के केवल युवा वर्ग ही नहीं बल्कि आज हर उम्र के लोग दिवाने हैं । आपको बता दें कि सेल्फी लेने के बाद लोग इसे तुरंत ही सोशल मीडिया पर डाल देते हैं जिससे की लोग उनकी सेल्फी को लाइक कर सके । मगर आपको बता दें कि एक ऐसी भी जगह है जहां पर सेल्फी को लेकर एक अजीबों गरीब ही फरमान सामने आया हैं जिसके बाद लोग सेल्फी लेने से भी डर रहे हैं ।

दरअसल, आपको बता दें कि मुंगेर जिला प्रशासन ने अनोखी पहल करते हुए सेल्फी के माध्यम से चिकित्सकों एवं पेरा मेडिकल स्टाफ हाजिरी प्रणाली की शुरूआत की है। इसके बारे में जिला पदाधिकारी ने बताया कि पूरे देश में मुंगेर पहला और एकमात्र ऐसा जिला है जहां पर सरकारी सदर अस्पताल और ग्रामीण सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सकों और पारा-मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘ सेल्फी हाजिरी प्रणाली‘ की शुरूआत की गई है।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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