कान छिदवाने के फायदे जान चौंक जाएंगे आप…

यह आज किया जाने फैशन नही है यह हमारे प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा है बस अंतर यह हो गया है की आज इसको फेशन का नाम दिया जाता है और उस वक्त परंपरा का

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जयपुर । कान छिदवाना आज कल तो जैसे फैशन ही हो चला है अजबकि ऐसा नही है की यह कोई आज का फैशन हो । यह आज किया जाने फैशन नही है यह हमारे प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा है बस अंतर यह हो गया है की आज इसको फेशन का नाम दिया जाता है और उस वक्त परंपरा का ।

आज हम बात कर रहे हैं कान छिदवाने के फ़ायदों  के बारे में  । आज के अंक में हम आपको इस बात की कुछ कस जानकारी के बारे में बताने जा रहे है जिसके पीछे का सच बहुत ही कम लोगों को पता है और इतना ही नही इसको जो लोग फैशन का नाम देते हैं वह भी इसके पीछे की कुछ जानकारी हासिल कर लें यह हमारा मकसद हैं । आइये बात  करते हैं इस बारे में ।

कान छिदवाना उसमें कान के आभूषन पहनना सिर्फ फेशन नही है यह एक संस्कार है जो 16 संस्कारों में से एक है । जी हाँ यह हिन्दू मान्यताओं के अनुसार 16 सांसकारों में से एक संस्कार है जिसको कर्ण छेदन संस्कार कहा जाता है और इसके पीछे  सिर्फ संस्कार की कहानी ही नही है की इसको करने से कोई गुलामी का अहसास दर्शाता है बल्कि इसके पीछे साइंटिफिक कारण है ।

जी हाँ कान छिदवाने से हमे स्वास्थ्य की ड्रिसती से कई फायदे  होते है  जो की बहुत ही काम के और काफी बड़े फायदे हैं ।

कान छिदवाने  से लकवा नामक रोग से बचाव होता  है ।

कान छिदवाने से पेट संबंधी बीमारियों से भी बचाव होता है ।

कान छिदवाने से आँखों की रोशनी पर भी बहुत असर होता है ।

पुराने समय में गुरुकुल जाने से पहले बच्चे की मेधा शक्ति बढ़ाने और बेहतर ज्ञान अर्जित करवाने के लिये उसके कान छेदने की प्रथा थी। ऐसा इसलिये क्योंकि कान छिदने से ब्रेन की पावर बढती है।

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