मलेरिया के बारे में ये दुर्लभ तथ्य नहीं जानते होंगे आप

मलेरिया के रोगी को बहुत तेज़ ठण्ड लगती है, सिर में काफी दर्द और उल्टियाँ भी होने लगती हैं इससे बचने के लिए अपने आसपास गंदा पानी जमा ना होने दे

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जयपुर। मलेरिया का नाम आते ही एक ऐसी महामारी सामने आ जाती है जो पिछले कई बरसों से मादा ऐनोफिलीज मच्छर की वजह से फैलाई जा रही है। दरअसल मलेरिया इटालियन ज़ुबान का लफ्ज़ है। यह शब्द माला एरिया से बना है। इसका अर्थ होता है बुरी हवा। जी हां, पहले यह बीमारी भूत प्रेत से फैलाई हुई मानी जाती थी। मगर हम सब जानते है कि यह मादा ऐनोफिलीज मच्छर का किया धरा है। उसमें पाए जाने वाले एक परजीवी प्लास्मोडियम की वजह से ही यह बीमारी फैलती हैं।

मलेरिया कोई आज की बीमारी नहीं है, इसका इतिहास तो चीन के प्राचीन दस्तावेजों से प्राप्त होता है। दरअसल 2700 ईसा पूर्व के कुछ प्राचीन अवशेषों से यह पता चलता है कि उस वक्त मलेरिया को दलदली बुखार यानी के मार्श फीवर के नाम से जाना जाता था। सन 1880 में मलेरिया पर सबसे पहला शोध चार्ल्स लुई अल्फोंस लैवेरिन नामक वैज्ञानिक द्वारा किया गया था। इसी ने बाद में बताया कि यह बीमारी किस तरह से फैलती है।

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वैसे तो सभी जानते है कि मलेरिया मादा ऐनोफिलीज की पैदाइश है। इस मच्छर के अंदर पलने वाला एक पैरासाइट जिसे प्लास्मोडियम कहते है के नापाक इरादों की वजह से ही मलेरिया का आरंभ होता है। जैसे ही यह मच्छर आपको काटता है तो आपके खून में यह परजीवी दाखिल हो जाता है। इसके बाद जो बुखार, कँपकँपी, पसीना आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जी मचलना और उल्टी होने का सिलसिला शुरू होता है वो खत्म ही नहीं होता है।

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कई बार तो यह बुखार पसीना आने से ही उतर जाता है। मगर सबकी किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती है कि मलेरिया इतने सस्ते में पीछा छोड़ दे। मलेरिया के रोगी को बहुत तेज़ ठण्ड लगती है, सिर में काफी दर्द और उल्टियाँ भी होने लगती हैं। इससे बचने के लिए अपने आसपास गंदा पानी जमा ना होने दे। साफ सफाई का पूरा ध्यान रखे। मच्छर से बचने के लिए हर संभव प्रयास करे।

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