Yashoda jayanti vrat katha: गृह क्लेश और संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है यशोदा जयंती व्रत, जानिए कथा

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आज यानी 4 मार्च दिन गुरुवार को यशोदा जयंती का व्रत किया जा रहा हैं हर साल यह जयंती फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती हैं मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन मां यशोदा का जन्म हुआ था। मां यशोदा ने ही भगवान श्रीकृष्ण का पालन पोषण किया था जबकि उनका जन्म देवकी मां की कोख से हुआ था। यशोदा जयंती के दिन विधि पूर्वक से मां यशोदा और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती हैं मान्यता है कि इस दिन इनकी पूजा से पापों से मुक्ति प्राप्त होती हैं और जीवन में सुख शांति भी आती हैं साथ ही भूत प्रेतों से भी छुटकारा मिल जाता हैं यशोदा जयंती के अवसर पर भगवान कृष्ण के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का दर्शन व पूजन के लिए तांता लग जाता हैं तो आज हम आपको यशोदा जयंती कथा के बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

जानिए यशोदा जयंती व्रत कथा—
पौराणिक कथा के मुताबिक एक समय में यशोदा ने भगवान श्रीहरि की घोर तपस्या की, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर मांगने को कहा। यशोदा ने कहा है ईश्वर मेरी तपस्या तभी पूरी होगी जब आप मुझे मेरे पुत्र रूप में प्राप्त होंगे। भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें कहा कि आने वाले काल में मैं वासुदेव और देवकी के घर में जन्म लूंगा लेकिन मुझे मातृत्व का सुख आपसे ही प्राप्त होगा। समय के साथ ऐसा ही हुआ और श्रीकृष्ण देवकी व वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में प्रकट हुए। इस दिन श्रीकृष्ण व यशोदा के विधिवत पूजन, व्रत व उपाय से निसंतान दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती हैं गृहक्लेशों से भी मुक्ति मिल जाती हैं और संपत्ति से भी लाभ प्राप्त होता हैं।

 

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