विश्व महासागर दिवस 2018: प्रदूषित रहने के बावजूद समुद्र बनाए रखते हैं सकारात्मक परिस्थितियां

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जयपुर। शायद आप नहीं जानते लेकिन बता दें कि हमारी पृथ्वी पर जीवन पैदा करने के लिए जिम्मेदार है, और यही कारण है इन्हीं महासागरों ने आवश्यक परिस्थितियों को बनाए की क्षमता विकसित हो चुकी है। बता दें कि पृथ्वी पर महासागरों का घेराव लगभग एक तिहाई से अधिक दायरे पर फैला है। कई वैज्ञानिकों ने बताया है कि महासागरीय पारितंत्र में अगर थोडा भी बदलाव होता है तो पृथ्वी के समूचे तंत्र को बनाए रखने का सामर्थ्य रखती हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि दुनियाभर की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत तटीय क्षेत्रों में रहता है औऱ इस स्तिति में समुद्र उनके खान-पान के लिए अहम स्रोत बनते हैं। अपनी अर्थव्यवस्था को बनाए रखने और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति के लिए समुद्रों का अहम योगदान होता है। जाहिर है कि वर्तमान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सहायता से महासागरों से पेट्रोलियम समेत कई प्राकृतिक संसाधनों का खनन किया जाता है।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन तो पर्यावरण और जमीनी समसम्याएं बढा ही रहा है, साथ में कई मौसमी परिघटनाएं औऱ उनके आधार को समझने के लिए महासागरों का अध्ययन करना बेहद आवश्यक होता जा रहा है। महासागरों के संबंध में अध्ययनों को लेकर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् और उसके अंतर्गत कार्यरत गोवा की राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान में कई अध्ययन जारी हैं।

महासागरों में बढता प्रदूषण चिंताजनक विषय है, इस मामले में अभी तक कई रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी हैं। जिनमें बताया गया है कि अरबों टन प्लास्टिक का कचरा प्रतिवर्ष महासागरों में फेंक दिया जाता है। जो समुद्र में नष्ट भी नहीं होता औऱ वहां के जनजीवन को भी प्रभावित कर रहा है। इससे समुद्रा वातावरण विषैली हो जाता है और अगर महासागरों की स्थिति गंभीर हुई तो इससे इंसानी जीवन भी बुरी तरह प्रभावित होगा।

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