श्व महासागर दिवस 2018: तो क्या एक दिन सूख जाएगा अटलांटिक महासागर?

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जयपुर। जयवायु परिवर्तान आज के समय की एक गंभीर समस्या बनती जा रही है जससे दुनियाभर के सभी जीव-अजीव प्राणी सामना कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पर्यावरण भी इससे बहुत बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव अटलांटिक महासागर पर नजर आता है।

वैज्ञानिकों ने कई बार चिंता व्यक्त की है कि उत्तरी गोलार्ध से उच्च अक्षांश की ओर उठने वाली गरम हवाएं उसे नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही हैं। उन्होने बताया कि 20वीं सदी के मध्‍यम दौर में अटलांटिक महासागर 15 फीसद की कमी का सामना कर चुका है। उनके मुताबिक, अटलांटिक के पानी  के स्तर में प्रतिसैकेंड तीस लाख क्‍यूबिक मीटर की कमी दर्ज की गई है।

जयवायु परिवर्तन के कारण तो अटलांटिक महासागर प्रभावित हो रहा है औऱ अटलांटिंक में हो रहे बदलावों से यूरोप प्रभावित हो रहा है। यह समुद्री जीवों के लिए खतरनाक तो है ही, साथ में इसके कारण अमेरिका की मुख्य तट पर झींगा मछली की संख्‍या को भी कम होते देखा गया है।

अटलांटिक में बदलाव के कारण के रूप में ग्रीनलैंड में बर्फ की च्‍ट्टानों का टूटना माना जा सकता है जिससे पानी की मात्रा बदल ही रही है। इसे जलवायु परवर्तान का सबसे घातक उदाहरण बताया जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया है कि जयवायु परवर्तन का महासागरीय करंट और उस पर पडने वाले प्रभावों को समझना मुश्किल है  क्योंकि इनका कोई भी पक्का सबूत नहीं है।

उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर पिछले 400 वर्षों में अपने सबसे निम्न स्तर पर पहुंच गया है। जिसके जिम्मेदार प्रकृतिक कारण तो हैं ही, साथ में मानवीय कारण भी इसके लिए उत्तरदायी हैं।

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