विश्व कप जीत ने ध्यान भंग किया : पॉल पोग्बा

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इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) क्लब मैनचेस्टर युनाइटेड के मिडफील्डर पॉल पोग्बा का मानना है कि फ्रांस के साथ फीफा विश्व कप जीतने से उनका ध्यान भंग हुआ। ‘ईएसपीएन’ के अनुसार, विश्व कप की जीत के बाद मैनचेस्टर युनाइटेड के कोच जोसे मोरिन्हो और पोग्बा के रिश्तों में खटास आ गई जिसके कारण उनसे क्लब की उपकप्तानी भी छीन ली गई।

पोग्बा ने कहा, “ध्यान केंद्रित करना, दोबारा शुरुआत करना और दमदार प्रदर्शन करना मुश्किल है क्योंकि हम सितारों को छू चुके हैं। हमारे विश्व कप सबसे बड़ी ट्रॉफी थी जो हम जीत सकते थे।”

पोग्बा ने कहा, “हमें चुनौतियां भी पसंद हैं, हमारे भी लक्ष्य हैं। उदाहरण के तौर पर मैंने कभी प्रीमियर लीग का खिताब नहीं जीता और अब यही मेरा लक्ष्य है। मैं यह ट्रॉफी हासिल करना चाहूंगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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