विश्व मुक्केबाजी : पंघल फाइनल में, मनीष कांसे तक सीमित (राउंडअप)

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एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पुरुष मुक्केबाज यहां जारी विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने से एक कदम दूर हैं। अमित ने सेमीफाइनल मुकाबला जीत फाइनल में प्रवेश कर लिया। मनीष कौशिक को हालांकि सेमीफाइनल में हार कर कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा है।

अमित ने शुक्रवार को 52 किलोग्राम भारवर्ग के सेमीफाइनल में कजाकिस्तान के साकेन बिबिसोनोव को 3-2 से हरा फाइनल में प्रवेश किया। वह विश्व चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले भारत के पहले पुरुष मुक्केबाज बने हैं।

अब तक पांच भारतीय पुरुष मुक्केबाजों ने विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य जीता है। विजेंद्र सिंह ने 2009 में यह उपलब्धि हासिल की थी जबकि विकास कृष्णन ने 2011 और शिवा थापा ने 2015 में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था।

इसके अलावा गौरव बिधूड़ी ने 2017 में सेमीफाइनल में पहुंचकर कांस्य जीता था लेकिन वह भारतीयों के पदक का रंग नहीं बदल सके थे।

शनिवार को होने वाले फाइनल में अमित का सामना रियो ओलम्पिक-2016 में स्वर्ण जीतने वाले शाखोबिदीन जोइरोव से होगा।

मैच के बाद अमित ने कहा, “जितना सोचकर आया था, उससे कहीं अधिक जोर लगाना पड़ा। मेरे साथियों ने मेरा काफी समर्थन किया है और इसके लिए मैं सबका धन्यवाद करना चाहूंगा। हमारी मुक्केबाजी के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। मैं पूरी कोशिश करुंगा कि अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीत सकूं।”

अमित ने जो सफलता हासिल की उसकी उम्मीद मनीष से भी थी लेकिन मनीष को 63 किलोग्राम भारवर्ग में विश्व चैम्पियन क्यूबा के एंडी क्रूज गोमेज ने 5-0 से मात दी।

मनीष ने हालांकि अच्छी प्रतिस्पर्धा दिखाई। मनीष ने पहले राउंड से ही अपने विपक्षी की गलती का इंतजार किया और काउंट अटैक के जरिए अंक बटोरने की कोशिश की लेकिन क्रूज का डिफेंस उनसे आगे रहा।

दूसरे राउंड में मनीष ने अपने काउंटर अटैक को और बेहतर किया और सही जगह पंच मारते हुए अंक बटोरे, लेकिन क्रूज ने चतुर रणनीति से उन्हें कमजोर किया और मनीष को नियंत्रण खोने पर मजबूर किया। इस बीच मनीष अपना नियंत्रण खोते भी नजर आए जिसका फायदा क्रूज ने उठाया।

तीसरे राउंड में क्यूबा के खिलाड़ी पूरी तरह से मनीष पर हावी रहे और आक्रामकता दिखाते हुए अंक लेते रहे।

मैच के बाद मनीष ने कहा, “मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ खेला लेकिन कुछ कमियां रह गईं जिसके कारण मुझे हार मिली। मैं इन कमियों पर काम करूंगा और कोशिश करूंगा कि एशिया ओसनिया क्वालीफायर्स में अपने देश के लिए ओलम्पिक कोटा हासिल करूं।”

उन्होंने कहा, “मैं इस बात से काफी खुश हूं कि मैं पहली बार विश्व चैम्पियनशिप में हिस्सा ले रहा था और पदक जीतने में सफल रहा। चार मुकाबले जीतने का यह अनुभव मेरे बहुत काम आएगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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