जीडी अग्रवाल के निधन पर ‘नर्मदा आंदोलन’ के कार्यकर्ताओं ने जताया शोक

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गंगा नदी को प्रवाहमान बनाने तथा प्रदूषित न होने देने के लिए अनशनरत डा. जी. डी. अग्रवाल के निधन पर ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के कार्यकर्ताओं ने दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार का रवैया शर्मनाक है। आंदोलन द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि आईआईटी – कानपुर के प्रोफेसर का निधन केंद्र एवं उत्तराखंड राज्य शासन की संवादहीनता की घोतक है।

विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि गंगा के नाम पर चुनाव लड़ने और गंगा को बचाने का दावा करने वाले प्रधानमंत्री की मंशा भी स्पष्ट होती है कि साधु सानंद की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।

आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर, कमला यादव, श्यामा मछुआरा, जयराज मंडलोई, देवेन्द्र सोलंकी, गौरीशंकर कुमावत, वाहिद मन्सूरी, देवराम कनेरा, पवन यादव, राजा मंडलोई, मुकेश भगोरिया, हरेसिह दरबार, दिनेश भाई आदि ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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