सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले में वर्ड्सवर्थ की कविता का जिक्र

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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की कविता का जिक्र किया है, जो धर्म से संबंधित है। अंग्रेजी के रोमांटिक कवि की कविता की चर्चा सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पांच जजों में से एक ने की। उन्होंने भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर भिन्न परिदृश्य को रखा।

फैसले में यह नहीं कहा गया है कि किस जज ने धर्म के संबंध में वर्ड्सवर्थ की कविता का जिक्र किया।

जज ने कहा कि धर्म और आस्था आध्यात्मिक जीवन को प्रोत्साहन देते हैं। उनके अनुसार, हिंदुत्व को प्रसिद्ध विद्वानों एवं विधिवेत्ताओं ने समय-समय पर परिभाषित किया है।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि सभी धर्मो का सार एक है और वह सत्य की खोज, आत्मा के बारे में और ज्यादा जानकारी और सर्वोच्च सत्ता के बारे में और अधिक जानकारी, जो कि एक है और सभी धर्मो में जिसकी पूजा की जाती है।

फैसले में कहा गया है कि सभी धर्मो में ईश्वर की महिमा का बखान किया गया है, जिससे हम जुड़ना चाहते हैं। वर्ड्सवर्थ ने अपनी एक सुंदर कविता में भी यही बात कही है।

उसके बाद उन्होंने ‘ओड इंटीमेशंस ऑफ इम्मोर्टलिटी फ्रॉम रिकलेक्शंस ऑफ अर्ली चाइल्डहुड’ शीर्षक वाली कविता का जिक्र किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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