जीत मिली, लेकिन सुधार की गुंजाइश : Dinesh Karthik

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कोलकाता नाइट राइडर्स ने बेशक बुधवार को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स को मात दे अपनी दूसरी जीत दर्ज की हो, लेकिन टीम के कप्तान दिनेश कार्तिक ने कहा है कि टीम के प्रदर्शन में सुधार की गुंजाइश है। कोलकाता ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में छह विकेट खोकर 174 रन बनाए। राजस्थान यह मैच 37 रनों से हार गई।

मैच के बाद कार्तिक ने कहा, “मैं इसे परफेक्ट नहीं कहूंगा। कई ऐसी जगहें हैं जहां हमें सुधार करने की जरूरत है। यह शानदार मैच था। कई चीजों ने मुझे संतुष्टि दी।”

कार्तिक ने टीम के युवा खिलाड़ियों की भी जमकर तारीफ की।

उन्होंने कहा, “शुभमन गिल ने जिस तरह से शुरुआत की वो मुझे अच्छा लगा। आंद्रे रसेल और इयोन मोर्गन ने जिस तरह से खेला उससे भी मैं खुश हूं। अच्छी बात यह थी कि युवा खिलाड़ी कैच के लिए जा रहे थे, चाहे वो कितना भी ऊंचा क्यों न हो। यह काफी खास है। उनके लिए यहां आकर अपना खेल खेलना शानदार था।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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