महिला टेनिस : कोच जेनकिन्स से अलग हुई ओसाका

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जापान की शीर्ष टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका अपने कोच जेरेमाइन जेनकिन्स से अलग हो गई हैं। जेनकिन्स फरवरी में ओसाका की टीम के साथ जुड़े थे।

वर्ल्ड नंबर-4 ओसाका ने ट्वीट किया, “मैं उस समय के लिए बहुत आभारी हूं जो हमने एक साथ बिताया और टेनिस कोर्ट में मैंने कई चीजें सीखीं। लेकिन मुझे लगता है कि अब बदलाव करने का एकदम सही समय है।”

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, 34 वर्षीय जेनकिन्स को ओसाका ने पूर्व कोच सासचा बाजिन से अलग होने के बाद अपने साथ जोड़ा था। आस्ट्रेलियन ओपन जीतने और वर्ल्ड नंबर-1 बनने के बाद ओसाका ने जेनकिन्स को अपनी टीम में शामिल किया था।

हालांकि, जेनकिन्स से जुड़ने के बाद 21 वर्षीय ओसाका किसी भी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाई। जेनकिन्स दिग्गज महिला खिलाड़ी वीनस विलियम्स के पूर्व पार्टनर हैं और अमेरिकी टेनिस संघ में महिला टीम के राष्ट्रीय कोच भी हैं।

हाल में समाप्त हुए अमेरिका ओपन में ओसाका को राउंड ऑफ-16 में स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेनकिक के खिलाफ हार झेलनी पड़ी थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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