महिला टेनिस : इटली ओपन के फाइनल में कोंटा

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ग्रेट ब्रिटेन की महिला टेनिस खिलाड़ी योहाना कोंटा ने यहां क्ले कोर्ट पर खेले जा रहे इटली ओपन के फाइनल में जगह बना ली है।

कोंटा ने तीन सेट तक चले एक बेहद कड़े सेमीफाइनल मुकाबले में हॉलैंड की किकी बर्टेस को 5-7, 7-5, 6-2 से पराजित किया।

बीबीसी के अनुसार, यह मैच कुल दो घंटे और 49 मिनट तक चला। 28 वर्षीय कोंटा का सामना अब फाइनल में वर्ल्ड नंबर-7 चेक गणराज्य की कैरोलिना प्लिस्कोवा के खिलाफ होगा।

कोंटा 1971 के बाद से इटली ओपन के फाइनल में पहुंचने वाली ग्रेट ब्रिटेन की पहली महिला खिलाड़ी हैं। 1971 में वर्जीनिया वेड ने इस प्रतियोतिगता के फाइनल में जगह बनाई थी।

बर्टेस फिलहाल, डब्ल्यूटीए रैंकिंग में चौथे पायदान पर काबिज है। कोंटा ने वर्ल्ड रैकिंग में शीर्ष-5 स्थान पर काबिज किसी खिलाड़ी को आखिरी बार 2017 में मात दी थी।

कोंटा ने 2017 के विम्बलडन में रोमानिया की स्टार खिलाड़ी सिमोना हालेप को पराजित किया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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