महिला क्रिकेट : चामारी अटापट्टू की श्रींलका की टीम में वापसी

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भारत के खिलाफ 11 सितम्बर से शुरू होने वाले तीन वनडे मैचों की सीरीज के लिए श्रीलंका की 15 सदस्यीय टीम में चामारी अटापट्टू की वापसी हुई है। उन्हें टीम की कमान सौंपी गई है। ‘क्रिकइंफो’ के अनुसार, टीम की शीर्ष बल्लेबाजों में से एक अटापट्टू डेंगू के कारण जून में हुए एशिया कप में हिस्सा नहीं ले पाईं थीं। मैदान पर वापसी करने के बाद वह यॉर्कशायर डायमंड्स के लिए वुमेंस सुपर लीग में खेलीं।

इनके अलावा, बल्लेबाज इमाल्का मेंडिस की भी दो साल बाद टीम में वापसी हुई है जबकि चयनकर्ताओं ने हरफनमौला खिलाड़ी 17 वर्षीय कविशा दिल्हारी को एक बार फिर मौका दिया है। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था।

टीम : चामारी अटापट्टू (कप्तान), प्रसादानी वीराकोडी, अनुष्का संजीवनी, निपुनी हंसिका, हसीनी परेरा, दिलानी मनोडारा, शशिकला सिरिवर्डेना, निलाक्षी डी सिल्वा, इमाल्का मेंडिस, श्रीपाली वीराकोडी, सुगंदिका कुमारी, इनोका रणवीरा, उदेशिका प्रबोधिनी, अमा कंचना, कविशा दिल्हारी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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