इस देश में महिलाओं को पहनने पड़ते है उम्र के हिसाब से कपडे !

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दोस्तों, हर देश का अपना अलग कानून होता है और वहां पर रहने वालों को उन्हें मानना भी पड़ता है । मगर आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जहां पर महिलाओं को उनकी उम्र के हिसाब से कपड़े पहनने होते हैं । दरअसल, तजाकिस्तान की सरकार ने महिलाओं के लिए ये अजीबोगरीब फरमान निकाला है ।

हम सब इस बात को जानते हैं कि, महिलाओं की ड्रेस अक्सर पुरुषों के आकर्षण का केंद्र होती है । हाल ही में तजाकिस्तान सरकार ने 7 से लेकर 70 साल तक की महिलाओं के लिए ड्रेस कोड तय किया है । इसके लिए संस्कृति मंत्रालय ने बाकायदा एक किताब भी जारी की है, जिसमें लिखा गया है कि, महिलाओं को किस मौके पर किस तरह के कपड़े पहनने हैं ।

इतना ही नहीं, यहां तक कि सार्वजनिक जगहों पर फ्लिप-फ्लॉप चप्पल या स्लीपर पहनने पर भी रोक है । किताब में बताया गया है कि महिलाएं काले रंग के कपड़े बिल्कुल नहीं पहन सकती है । इस्लामिक कपड़ों के खिलाफ अभियान के तहत सिर ढंकने के लिए कपड़े के इस्तेमाल पर भी रोक है ।

बता दें कि, इस फरमान के बाद में कई लोगों ने इसका विरोध भी किया है ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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