विप्रो ने अपना तीसरा आईआईओटी सेंटर कोच्चि में खोला

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देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो लिमिटेड ने गुरुवार को केरल के कोच्चि में अपना इंस्डस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईआईओटी) सेंटर खोला। यह जानकारी कंपनी की ओर से एक बयान में दी गई। कंपनी ने कहा, “यह सेंटर विप्रो की नवाचारी आईआईओटी समाधान विकसित करने की प्रतिबद्धता को निर्देशित करता है, जोकि औद्योगिक विनिर्माण, ऑटोमोटिव, हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल्स, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स व गुड्स और युटिलिटी के क्षेत्र में ग्राहकों के लिए प्रौद्योगिकी के प्रसार का परिचायक है।”

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), ब्लॉकचेन और रोबोटिक्स का इस्तेमाल करके यह सेंटर बाजार के लिए तैयार आईओटी समाधान विकसित करेगा।

कैलिफोर्निया स्थित माउंटेन व्यू और देश में बेंगलुरू के बाद यह विप्रो का तीसरा सेंटर है जो इंडस्ट्रियल आईओटी को समर्पित है।

कंपनी ने कहा कि आईआईओटी पर कोच्चि में 12-13 मार्च को आयोजित दो दिवसीय हेकाथन के विजेताओं को नए आईआईओटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम में शामिल होने का मौका दिया जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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