भारत में टेस्ट सीरीज जीतना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि : ग्राम स्वान

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इंग्लैंड के पूर्व ऑफ स्पिनर ग्राम स्वान ने कहा है कि भारत को उसके ही घर में टेस्ट सीरीज में मात देना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। इंग्लैंड ने 2012/13 में भारत को भारत में ही मात दी थी। उस सीरीज में स्वान ने 20 विकेट लिए थे और वह भारत के प्रज्ञान ओझा के साथ सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे।

स्वान ने सोनी टेन पिट शॉप के फेसबुक पेज पर एक शो में कहा, “ईमानदारी से कहूं तो जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो यह मेरी एक स्पिनर के तौर पर सबसे बड़ी उपलब्धि साबित होती है।”

उन्होंने कहा, “हम 2010 में आस्ट्रेलिया में जीते, लेकिन मैंने वहां ज्यादा कुछ नहीं किया था। मैंने वहां सिर्फ एलेस्टर कुक को हजारों रन बनाते हुए और जेम्स एंडरसन को विकेट लेते हुए देखा था, लेकिन भारत में वो सीरीज मेरे जीवन के सबसे अच्छे समय में से एक है।”

स्वान और उनके साथ स्पिन गेंदबाजी की बागडोर संभालने वाले बाएं हाथ के स्पिनर मोंटी पानेसर ने उस सीरीज में कुल मिलाकर 37 विकेट लिए थे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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