वेदांता को एलएसई सूची से हटाने से नहीं होगा साख पर असर : मूडीज

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मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने गुरुवार को कहा कि अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली कंपनी वेदांता रिसोर्सेस को लंदन स्टॉक एक्सचेंज द्वारा प्रस्तावित सूची से हटाने से कंपनी की साख पर तत्काल कोई असर नहीं होगा। मूडीज ने हालांकि कहा कि इसके स्वामित्व वाली कंपनी वोल्कन इन्वेस्टमेंट लिमिटेड द्वारा प्राकृतिक संसाधनों को पूरी तरह से अधिकार में लेने की घोषणा से नकदी संग्रह का संकट बना रहेगा।

इसी सप्ताह वेदांता रिसोर्सेस और अनिल अग्रवाल के ऐच्छिक न्यास के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी वोल्कन इंवेस्टमेंट ने घोषणा की थी कि वेदांता की शेष हिस्सेदारी के लिए उसने हर संभव नकदी की पेशकश पर सैद्धांतिक समझौता किया है।

मूडीज के बयान के अनुसार, “पेशकश में वोल्कन को शेष 33.47 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए अनुमानित एक अरब डॉलर कंपनी को देनी होगी। अगर वोल्कन 90 फीसदी या उससे अधिक हिस्सेदारी हासिल करने में सफल रही तो वेदांता को लंदन स्टॉक एक्सचेंज की सूची से हटाया दिया जाएगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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